Lohit Mandal / Thu, Jan 11, 2024 / Post views : 705
है. क्योंकि श्रीराम का मंदिर यह केवल एक पूजा की दृष्टि से अपने आराध्य का मंदिर, केवल ऐसा प्रसंग नहीं है. इस देश की पवित्रता, और इस देश की मर्यादा की स्थापना पक्की होने का यह प्रसंग है. संपूर्ण देश में श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना जाता है. हम स्वतंत्र हुए तो स्वतंत्रता में जो ‘स्व’ है, वो हमारी मर्यादा है. उस ‘स्व’ के कारण हमारा जीवन पवित्र है, उस ‘स्व’ के कारण हमारी दुनिया भर में प्रतिष्ठा है. उसका एक प्रगटीकरण, संपूर्ण विश्व में यह घोषणा कि भारत अपने ‘स्व’ पर खड़ा हुआ है, और अपने मर्यादा संपन्न जीवन से पूरे विश्व में मांगल्य और शांति की स्थापना करने के लिए आगे बढ़ेगा. इस प्रसंग पर सब लोग तो आ नहीं पाएंगे, कुछ को निमंत्रण मिला है वो आएंगे. परंतु, गांव-गांव में, घर-घर में इसका
उत्साह है. उसका कारण है कि पहली बात, इतने वर्षों के बाद भारत के ‘स्व’ के
प्रतीक का पुनर्निर्माण हमने किया. वो हमारे पुरुषार्थ के आधार पर किया. दूसरी बात है कि जो अपनी एक दिशा होनी चाहिए, उसको पकड़ने का प्रयास भी अनेक दशकों से हम लोग कर रहे थे, वो हमें मिल गई है और स्थापित हो गई है. एक विश्वास सबके मन में स्थापित हुआ है, उसके कारण संपूर्ण देश का वातावरण मंगलमय बना है. और ऐसे में हम प्रत्यक्ष वहां उपस्थित रहेंगे, उस प्रसंग को देखेंगे, उसमें सहयोगी रहेंगे भगवत जी ने ये भी कहा...यह कहीं किसी जन्म में पुण्य हुआ होगा उसी का फल हमको मिल रहा है. इसलिए मैं आपका कृज्ञतापूर्वक धन्यवाद करता हूं. ये तो मांग के भी न मिलने वाला अवसर है, वो मिला है.. .जरूर उसमें रहूंगा.विज्ञापन
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