*पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए पथ प्रदर्शक है नारदीय दृष्टि:- महेश प्रसाद*
एमसीबी। जिले के मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में आज दिनांक 24 मई शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ कोरिया-एमसीबी के पत्रकारों द्वारा नारद मुनि जी की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान नारद मुनि की पूजा करते हुए प्रदेश अध्यक्ष महेश प्रसाद ने की। पूजा अर्चना के पश्चात भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष महेश प्रसाद ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए बताया आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है, क्योंकि भारत ही विश्व को सही दिशा और दशा देने की क्षमता रखता है। ऐसे में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होने के कारण मीडिया जगत की भूमिका और अधिक बढ़ जाती है कि विश्व के समक्ष अपने राष्ट्र की कैसी तस्वीर प्रस्तुत की जाए। भारत हमेशा से ही ज्ञान आराधक राष्ट्र रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि पत्रकारिता में नारदीय दृष्टि मीडिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक पथ प्रदर्शक का मार्ग प्रशस्त करती है। क्योंकि हमें पता है कि न्यूज़ में व्यूज का समावेश करने से पत्रकारिता एजेंडे में बदल जाती है, इसलिए पत्रकार केवल समाचार दें और पक्षकार न बनें और समाचार देते समय समाचार की सत्यता की भी जांच करें। समाज भी पत्रकार से अपेक्षा करता है कि वो 'पत्रकार बनें, पक्षकार नहीं'। पत्रकार समाज का दर्पण है। पत्रकार का प्रमुख कार्य समाज की समस्याओं को उजागर करना है। आज के युग में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और प्रासंगिकता बहुत बढ़ गई है क्योंकि पत्रकार समाज की दिशा तय करने की ताकत रखता है। मीडिया ही देश की छवि विश्व के सामने रखता है। मीडिया को निष्पक्ष रहकर कार्य करना चाहिए। पत्रकार अपनी लेखनी से समाज की दशा और दिशा बदलने की ताकत रखता है। प्रत्येक पत्रकार अपनी कलम से किसी न किसी रूप में समाज की सेवा करता है।
*देवर्षि ही नहीं, दिव्य पत्रकार भी हैं महर्षि नारद मुनि*
सृष्टि के प्रथम संदेशवाहक देवर्षि नारद नाम सुनते ही इधर-उधर विचरण करने वाले व्यक्तित्व की अनुभूति होती है। आम धारणा यही है कि देवर्षि नारद ऐसी 'विभूति' हैं जो 'इधर की उधर' करते रहते हैं। प्रायः नारद को चुगलखोर के रूप में जानते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। मेरा मत है कि नारद इधर-उधर घूमते हुए संवाद-संकलन का कार्य करते हैं। नारद को इधर से उधर (इस लोक से उस लोक में) घूमना पड़ता है तो इसमें संवाद की जो अदला-बदली हो जाती है उसे लोगों ने नकारात्मक दृष्टि से देखा और नारद को 'भिड़ाने वाले' या 'कलह कराने वाले' किरदार के फ्रेम में फिट कर दिया। नारद की छवि को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि वे 'चोर को कहते हैं कि चोरी कर और साहूकार को कहते हैं कि जाग।' लेकिन यह सच नहीं है। सच तो यह है कि नारद घूमते हुए सीधे संवाद कर रहे हैं और सीधे संवाद भेज रहे हैं इसलिए नारद सतत सजग-सक्रिय हैं यानी नारद का संवाद 'टेबल-रिपोर्टिंग' नहीं 'स्पॉट-रिपोर्टिंग' है इसलिए उसमें जीवंतता है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष महेश प्रसाद, प्रदेश महासचिव सावन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा वस्त्रकार, एमसीबी जिला अध्यक्ष दिनेश द्विवेदी, कोरिया जिलाध्यक्ष अज़ीम अंसारी, हरिओम पाण्डेय, प्रदीप पाटकर, बृजभूषण श्रीवास्तव, करन सोनी, बाला राव, अजीत नारायण, सुरेश सारथी, मनीष सिंह, नोहर प्रसाद विश्वकर्मा, अंकित मिश्रा, आदि सम्मिलित हुए।